श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 185
 
 
श्लोक  1.7.185 
যত্ন করি’ কেহ নিজ-বালক পডায
কত ভাগ্যে আপনে পডিতে শিশু চায
यत्न करि’ केह निज-बालक पडाय
कत भाग्ये आपने पडिते शिशु चाय
 
 
अनुवाद
"कुछ लोग अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। अगर बच्चा पढ़ना चाहता है तो यह बहुत शुभ होता है।"
 
"Some people work very hard to educate their children. If the child wants to study, it is very auspicious."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)