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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण
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श्लोक 180
श्लोक
1.7.180
বাল্য-ভাবে সর্ব-তত্ত্ব কহি’ প্রভু হাসে
তথাপি না বুঝে কেহ তা’ন মাযা-বশে
बाल्य-भावे सर्व-तत्त्व कहि’ प्रभु हासे
तथापि ना बुझे केह ता’न माया-वशे
अनुवाद
भगवान एक साधारण बालक की तरह परम सत्य पर बोलते हुए मुस्कुराए, फिर भी उनकी माया के प्रभाव से कोई उन्हें पहचान नहीं पाया।
The Lord smiled like an ordinary child speaking the ultimate truth, yet due to the influence of His Maya no one could recognize Him.
तात्पर्य
सर्व-तत्त्व शब्द आध्यात्मिक एकता के विज्ञान को संदर्भित करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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