vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण
»
श्लोक 174
श्लोक
1.7.174
যথা মোর স্থিতি, সেই সর্ব পুণ্য-স্থান
গঙ্গা-আদি সর্ব তীর্থ তহিঙ্ অধিষ্ঠান
यथा मोर स्थिति, सेइ सर्व पुण्य-स्थान
गङ्गा-आदि सर्व तीर्थ तहिङ् अधिष्ठान
अनुवाद
"मैं जहाँ भी हूँ, वह स्थान परम पवित्र हो जाता है। गंगा और अन्य सभी तीर्थ उस स्थान पर विद्यमान हैं।"
"Wherever I am, that place becomes supremely sacred. The Ganges and all other holy places exist at that place."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×