श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  1.7.169 
প্রভু বোলে, “তোরা মোরে না দিস্ পডিতে
ভদ্রাভদ্র মুর্খ-বিপ্রে জানিবে কেমতে?”
प्रभु बोले, “तोरा मोरे ना दिस् पडिते
भद्राभद्र मुर्ख-विप्रे जानिबे केमते?”
 
 
अनुवाद
भगवान ने उत्तर दिया, "आप मुझे अध्ययन करने की अनुमति नहीं देते हैं, इसलिए मैं अच्छे और बुरे या मूर्ख और ब्राह्मण के बीच अंतर कैसे जानूंगा?"
 
The Lord replied, "You do not allow me to study, so how will I know the difference between good and bad or a fool and a Brahmin?"
तात्पर्य
भद्राभद्र शब्द का अर्थ है “पवित्र और अपवित्र।”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)