श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 168
 
 
श्लोक  1.7.168 
বর্জ্য-হাঙ্ডী, ইহা-সব পরশিলে স্নান
এত-দিনে তোমার এ না জন্মিলে জ্ঞান?”
वर्ज्य-हाङ्डी, इहा-सब परशिले स्नान
एत-दिने तोमार ए ना जन्मिले ज्ञान?”
 
 
अनुवाद
"ये तो अस्वीकृत बर्तन हैं, और अगर कोई इन्हें छू ले तो उसे नहाना पड़ेगा। क्या अब तक तुम्हें यह बात समझ में नहीं आई?"
 
"These are unapproved utensils, and anyone who touches them will have to take a bath. Haven't you understood this yet?"
तात्पर्य
पराशिल शब्द का अर्थ है "अगर कोई छूता है", और ज्ञान शब्द स्वच्छ और अशुद्ध या पवित्रता और अशुद्धता की धारणा को दर्शाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)