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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण
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श्लोक 164
श्लोक
1.7.164
বর্জ্য-হাঙ্ডী-গণ সব করি’ সিṁহাসন
তথি বসি’ হাসে গৌরসুন্দর-বদন
वर्ज्य-हाङ्डी-गण सब करि’ सिꣳहासन
तथि वसि’ हासे गौरसुन्दर-वदन
अनुवाद
उन अस्वीकृत पात्रों को सिंहासन के रूप में प्रयोग करते हुए, भगवान गौरसुन्दर वहाँ बैठकर मुस्कुराये।
Using those rejected vessels as a throne, Lord Gaurasundara sat there and smiled.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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