श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 162
 
 
श्लोक  1.7.162 
বিষ্ণু-নৈবেদ্যের যত বর্জ্য-হাঙ্ডী-গণ
বসিলেন প্রভু হাঙ্ডী করিযা আসন
विष्णु-नैवेद्येर यत वर्ज्य-हाङ्डी-गण
वसिलेन प्रभु हाङ्डी करिया आसन
 
 
अनुवाद
इसके बाद वह उन पुराने अस्वीकृत बर्तनों पर बैठ गए, जिनका उपयोग भगवान विष्णु के लिए प्रसाद तैयार करने के लिए किया गया था।
 
He then sat on the old discarded utensils that had been used to prepare offerings to Lord Vishnu.
तात्पर्य
शब्द वज्य का अर्थ है "अस्वीकृत" या "त्याग दिया गया"। शब्द हांडी संस्कृत शब्द हांडी का भ्रष्ट रूप है, जो चावल पकाने के लिए एक बर्तन है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)