श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 161
 
 
श्लोक  1.7.161 
এক-দিন মিশ্র চলিলেন কার্যান্তর
পডিতে না পায প্রভু, ক্রোধিত অন্তর
एक-दिन मिश्र चलिलेन कार्यान्तर
पडिते ना पाय प्रभु, क्रोधित अन्तर
 
 
अनुवाद
एक दिन, जब जगन्नाथ मिश्र अपने कार्य पर चले गए, तो भगवान बहुत क्रोधित हो गए, क्योंकि उन्हें अध्ययन करने की अनुमति नहीं थी।
 
One day, when Jagannatha Mishra went to his work, the Lord became very angry because he was not allowed to study.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)