श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  1.7.158 
’কে বান্ধিল দুযার?’—করযে ’হায হায’
জাগিলে গৃহস্থ, প্রভু উঠিযা পলায
’के बान्धिल दुयार?’—करये ’हाय हाय’
जागिले गृहस्थ, प्रभु उठिया पलाय
 
 
अनुवाद
जब गृहस्वामी चिल्लाया, “मेरा दरवाज़ा किसने बंद कर दिया है?” तो प्रभु भाग गये।
 
When the householder cried out, “Who has locked my door?” the Lord ran away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)