श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  1.7.156 
গরু-জ্ঞানে গৃহস্থ করযে ’হায হায’
জাগিলে গৃহস্থ, শিশু-সṁহতি পলায
गरु-ज्ञाने गृहस्थ करये ’हाय हाय’
जागिले गृहस्थ, शिशु-सꣳहति पलाय
 
 
अनुवाद
यह सोचकर कि कोई सांड उसके केलों को नष्ट कर रहा है, गृहस्वामी विलाप करते हुए चिल्लाया। जैसे ही वह अपने घर से बाहर आया, लड़के भाग गए।
 
Thinking a bull was destroying his bananas, the homeowner cried out in wail. As soon as he came out of his house, the boys ran away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)