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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण
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श्लोक 152
श्लोक
1.7.152
কিবা নিজ-ঘরে প্রভু, কিবা পর-ঘরে
যাহা পায তাহা ভাঙ্গে, অপচয করে
किबा निज-घरे प्रभु, किबा पर-घरे
याहा पाय ताहा भाङ्गे, अपचय करे
अनुवाद
चाहे वह अपने घर में हो या किसी और के घर में, प्रभु जो कुछ भी अपने हाथ में लेते थे उसे तोड़ देते थे और बर्बाद कर देते थे।
Whether it was in his own house or in someone else's house, the Lord would break and ruin whatever he took in his hands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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