श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  1.7.150 
নিত্য ধর্ম সনাতন শ্রী-গৌরাঙ্গ রায
না লঙ্ঘে জনক-বাক্য, পডিতে না যায
नित्य धर्म सनातन श्री-गौराङ्ग राय
ना लङ्घे जनक-वाक्य, पडिते ना याय
 
 
अनुवाद
शाश्वत धार्मिक सिद्धांतों के साक्षात् स्वरूप श्री गौरांग राय ने अपने पिता के निर्देशों का पालन किया और अपनी पढ़ाई छोड़ दी।
 
Shri Gauranga Rai, the embodiment of eternal religious principles, followed his father's instructions and gave up his studies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)