श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.7.15 
এই-মত চিন্তে বিশ্বরূপ-মহাশয
কাহারে না ভাঙ্গে তত্ত্ব, স্ব-কর্ম করয
एइ-मत चिन्ते विश्वरूप-महाशय
काहारे ना भाङ्गे तत्त्व, स्व-कर्म करय
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विचार करके विश्वरूप अपने ही कार्यों में लगे रहे और इस रहस्य को किसी को नहीं बताया।
 
Thinking like this, Vishwaroop remained busy in his work and did not tell this secret to anyone.
तात्पर्य
तत्त्व ना भाँगे या वाक्यांश से यह संकेत मिलता है कि विश्वरूप ने कभी किसी को यह नहीं बताया कि श्री विश्वंभर ही श्री कृष्ण हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)