vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण
»
श्लोक 148
श्लोक
1.7.148
যে তোমার ইচ্ছা, বাপ, তাই দিব আমি
গৃহে বসি’ পরম-মঙ্গলে থাক তুমি”
ये तोमार इच्छा, बाप, ताइ दिब आमि
गृहे वसि’ परम-मङ्गले थाक तुमि”
अनुवाद
"मेरे प्यारे बेटे, जो कुछ तुम चाहोगे, मैं तुम्हें दूँगा। घर पर आराम से रहो।"
"My dear son, I will give you whatever you want. Make yourself comfortable at home."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×