श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  1.7.141 
এতেক জানিহ,—থাকিলেও কিছু নয
যা’রে যেন কৃষ্ণ-আজ্ঞা, সেই সত্য হয
एतेक जानिह,—थाकिलेओ किछु नय
या’रे येन कृष्ण-आज्ञा, सेइ सत्य हय
 
 
अनुवाद
“यह निश्चित रूप से जान लो कि किसी के पास बहुत सारा ऐश्वर्य हो सकता है, लेकिन जब तक कृष्ण अनुमति नहीं देते, वह उसका आनंद नहीं ले सकता।
 
“Know this for sure that one may have a lot of opulence, but unless Krishna permits, he cannot enjoy it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)