श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.7.14 
যত অমানুষি কর্ম নিরবধি করে
এ বুঝি,—খেলেন কৃষ্ণ এ শিশু-শরীরে”
यत अमानुषि कर्म निरवधि करे
ए बुझि,—खेलेन कृष्ण ए शिशु-शरीरे”
 
 
अनुवाद
"मैं उनके द्वारा निरंतर किए जाने वाले असाधारण कार्यों से समझ सकता हूँ कि भगवान कृष्ण इस बालक के शरीर के माध्यम से लीलाओं का आनंद लेते हैं।"
 
"I can understand from the extraordinary activities he constantly performs that Lord Krishna enjoys pastimes through the body of this child."
तात्पर्य
अमानुषी शब्द का अर्थ है, "मनुष्य की विशेषता नहीं", "इस दुनिया का नहीं", या "दिव्य"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)