श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  1.7.139 
যা’র গৃহে আছযে উত্তম উপভোগ
তা’রে কৃষ্ণ দিযাছেন কোন মহারোগ
या’र गृहे आछये उत्तम उपभोग
ता’रे कृष्ण दियाछेन कोन महारोग
 
 
अनुवाद
“किसी के घर में भोग-विलास की वस्तुएं हो सकती हैं, फिर भी प्रभु की व्यवस्था से वह रोग से पीड़ित हो सकता है।
 
“One may have luxuries in his home, yet by the law of the Lord he may be afflicted with disease.
तात्पर्य
उपभोग शब्द का अर्थ है "सुख भोगने का उत्तम साधन।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)