श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  1.7.138 
কৃষ্ণ-কৃপা বিনে নহে দুঃখের মোচন
থাকিল বা বিদ্যা, কুল, কোটি-কোটি ধন
कृष्ण-कृपा विने नहे दुःखेर मोचन
थाकिल वा विद्या, कुल, कोटि-कोटि धन
 
 
अनुवाद
“कृष्ण की कृपा के बिना किसी का संकट कभी कम नहीं हो सकता, भले ही वह उच्च शिक्षा, अच्छे जन्म और महान धन से संपन्न हो।
 
“Without the grace of Krishna one's distress can never be alleviated, even if one is highly educated, well-born and blessed with great wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)