श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  1.7.133 
সাক্ষাতেই এই কেনে না দেখ আমাত
পডিযাও আমার ঘরে কেনে নাহি ভাত?
साक्षातेइ एइ केने ना देख आमात
पडियाओ आमार घरे केने नाहि भात?
 
 
अनुवाद
"यह मेरे जीवन में प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। हालाँकि मैं शिक्षित हूँ, फिर भी मैं गरीब हूँ।"
 
"This can be seen directly in my life. Although I am educated, I am still poor."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)