श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  1.7.132 
কুল-বিদ্যা-আদি উপলক্ষণ সকল
সবারে পোষযে কৃষ্ণ, কৃষ্ণ-সর্ব-বল
कुल-विद्या-आदि उपलक्षण सकल
सबारे पोषये कृष्ण, कृष्ण-सर्व-बल
 
 
अनुवाद
“शिक्षा, जन्म और अन्य गुण केवल ऊपरी हैं; कृष्ण ही इन सबके पालक और बल हैं।
 
“Education, birth, and other qualities are merely superficial; Krishna is the sustainer and strength of all these.
तात्पर्य
उपलक्षण शब्द उस वस्तु की प्रवृत्ति को प्रकट करता है, वस्तु की प्राथमिक प्रवृत्ति नहीं, अपितु द्वितीयक गुण।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)