श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  1.7.131 
কিবা মুর্খ, কি পণ্ডিত, যাহার যেখানে
কন্যা লিখিযাছে কৃষ্ণ, সে হৈবে আপনে
किबा मुर्ख, कि पण्डित, याहार येखाने
कन्या लिखियाछे कृष्ण, से हैबे आपने
 
 
अनुवाद
“चाहे कोई मूर्ख हो या विद्वान, वे जहाँ भी और जिससे भी कृष्ण ने उनके लिए विवाह करने की अनुमति दी है, उससे विवाह करेंगे।
 
“Whether one is a fool or a scholar, they will marry wherever and whomever Krishna has permitted them to marry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)