श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  1.7.130 
জগত্ পোষণ করে জগতের নাথ
’পাণ্ডিত্যে পোষযে,—কেবা কহিলা তোমাত?
जगत् पोषण करे जगतेर नाथ
’पाण्डित्ये पोषये,—केबा कहिला तोमात?
 
 
अनुवाद
"परमेश्वर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का पालन-पोषण करते हैं। तुम्हें किसने बताया कि अच्छी शिक्षा किसी का पालन-पोषण कर सकती है?"
 
“God nurtures the entire universe. Who told you that good education can nurture someone?”
तात्पर्य
शब्द पोषये का अर्थ है "रखरखाव करता है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)