श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.7.13 
“এ বালক কভু নহে প্রাকৃত ছাওযাল
রূপে, আচরণে,—যেন শ্রী-বাল-গোপাল
“ए बालक कभु नहे प्राकृत छाओयाल
रूपे, आचरणे,—येन श्री-बाल-गोपाल
 
 
अनुवाद
"यह बालक कोई साधारण बालक नहीं हो सकता। इसका सौन्दर्य और क्रियाकलाप श्री बालगोपाल के समान ही प्रतीत होते हैं।"
 
"This child cannot be an ordinary child. His beauty and activities seem to be similar to those of Shri Balgopal."
तात्पर्य
शब्द प्राकृत छाओयाला एक साधारण सांसारिक बच्चे को इंगित करता है जो अपने कर्म के फलों का आनंद लेने के लिए मजबूर है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)