श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  1.7.127 
অতএব ইহার পডিযা কার্য নাই
মুর্খ হঞা ঘরে মোর রহুক নিমাঞি”
अतएव इहार पडिया कार्य नाइ
मुर्ख हञा घरे मोर रहुक निमाञि”
 
 
अनुवाद
"इसलिए अब उसे पढ़ाई नहीं करनी चाहिए। निमाई को मूर्ख बनकर घर पर ही रहना चाहिए।"
 
"So he shouldn't study anymore. Nimai should be a fool and stay at home."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)