श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  1.7.122 
শচী-প্রতি বোলে জগন্নাথ মিশ্র-বর
“এহো পুত্র না রহিবে সṁসার-ভিতর
शची-प्रति बोले जगन्नाथ मिश्र-वर
“एहो पुत्र ना रहिबे सꣳसार-भितर
 
 
अनुवाद
श्री मिश्र ने शची से कहा, "यह पुत्र भी घर पर नहीं रहेगा।
 
Shri Mishra said to Shachi, “This son will also not stay at home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)