श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  1.7.121 
শুনিঞা পুত্রের গুণ জননী হরিষ
মিশ্র পুনঃ চিত্তে বড হয বিমরিষ
शुनिञा पुत्रेर गुण जननी हरिष
मिश्र पुनः चित्ते बड हय विमरिष
 
 
अनुवाद
माता शची अपने पुत्र के असाधारण गुणों के बारे में सुनकर प्रसन्न हुईं, जबकि जगन्नाथ मिश्र पुनः हृदय में बहुत उदास हो गए।
 
Mother Shachi was delighted to hear about her son's extraordinary qualities, while Jagannatha Mishra again became deeply saddened at heart.
तात्पर्य
विमरीश शब्द का अर्थ \"उदास\" होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)