श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  1.7.118 
সন্তোষে কহেন সবে জগন্নাথ-স্থানে
তুমি ত’ কৃতার্থ, মিশ্র, এ-হেন নন্দনে
सन्तोषे कहेन सबे जगन्नाथ-स्थाने
तुमि त’ कृतार्थ, मिश्र, ए-हेन नन्दने
 
 
अनुवाद
तब उन्होंने संतुष्ट होकर जगन्नाथ मिश्र से कहा, "आप बहुत भाग्यशाली हैं कि आपको ऐसा पुत्र मिला है।
 
Then he said to Jagannatha Mishra, satisfied, “You are very fortunate to have such a son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)