श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  1.7.115 
খেলা সম্বরিযা প্রভু যত্ন করি’ পডে
তিলার্দ্ধেক পুস্তক ছাডিযা নাহি নডে
खेला सम्बरिया प्रभु यत्न करि’ पडे
तिलार्द्धेक पुस्तक छाडिया नाहि नडे
 
 
अनुवाद
भगवान ने खेलना छोड़ दिया और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। वे एक पल के लिए भी अपनी किताबें नहीं छोड़ते थे।
 
Bhagwan stopped playing and concentrated on his studies, never leaving his books for even a moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)