श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  1.7.102 
যোগ্য নহে এ-সব লোকের সনে বাস
বনে চলি’ যাঙ বলি’ সবে ছাডে শ্বাস
योग्य नहे ए-सब लोकेर सने वास
वने चलि’ याङ बलि’ सबे छाडे श्वास
 
 
अनुवाद
“ऐसे लोगों के साथ रहना उचित नहीं है, इसलिए हमें वन में चले जाना चाहिए।” यह कहकर उन्होंने गहरी साँस ली।
 
"It's not right to live with such people, so we should go into the forest." Saying this, he took a deep breath.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)