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श्लोक 1.6.122  |
বিষ্ণু-পূজা-সজ্জ কেনে কর অপহার?
’বিষ্ণু’ করিযাও ভয নাহিক তোমার?” |
विष्णु-पूजा-सज्ज केने कर अपहार?
’विष्णु’ करियाओ भय नाहिक तोमार?” |
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| अनुवाद |
| "तुम भगवान विष्णु की पूजा की सामग्री क्यों चुराते हो? क्या तुम्हें भगवान विष्णु पर कोई श्रद्धा नहीं है?" |
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| "Why do you steal the materials meant for worshipping Lord Vishnu? Don't you have any faith in Lord Vishnu?" |
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