श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.5.69 
মিশ্র বোলে,—“আজি দেখ’ করোঙ্ তোর কার্য
তোর মতে পরম-অবোধ আমি আর্য!
मिश्र बोले,—“आजि देख’ करोङ् तोर कार्य
तोर मते परम-अबोध आमि आर्य!
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र बोले, "देखो, आज मैं तुम्हारे साथ क्या करूँगा! मैं आर्य हूँ, फिर भी तुम मुझे मूर्ख समझते हो!"
 
Jagannatha Mishra said, "Look what I will do to you today! I am an Aryan, yet you think I am a fool!"
तात्पर्य
जगन्नाथ मिश्र ने कहा, "हे शरारती बालक, आज मैं तुम्हें तुम्हारी शरारत के लिए सज़ा दूंगा। मैं इतना विद्वान और प्रतिष्ठित हूं, और तुम मुझे मूर्ख समझते हो। यह बहुत ही अनुचित है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)