श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.5.44 
মিশ্র বোলে,—“মোরে যদি থাকে ভৃত্য-জ্ঞান
আর-বার পাক কর, করি’ দেঙ স্থান
मिश्र बोले,—“मोरे यदि थाके भृत्य-ज्ञान
आर-बार पाक कर, करि’ देङ स्थान
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र बोले, "अगर आप मुझे अपना सेवक मानते हैं, तो कृपया फिर से खाना बना दीजिए। मैं सब इंतज़ाम कर दूँगा।"
 
Jagannath Mishra said, "If you consider me your servant, please cook the food again. I will make all the arrangements."
तात्पर्य
जगन्नाथ मिश्र ने अपने वैष्णव अतिथि से जो विनम्रता पूर्वक बातें कहीं थीं उनका सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए जो एक वैष्णव के अनुकूल होती हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)