श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.5.27 
প্রণতি করিযা মিশ্র বোলেন বচন
“জগতের ভাগ্যে সে তোমার পর্যটন
प्रणति करिया मिश्र बोलेन वचन
“जगतेर भाग्ये से तोमार पर्यटन
 
 
अनुवाद
हाथ जोड़कर जगन्नाथ मिश्र ने कहा, “आपकी यात्रा संसार के कल्याण के लिए है।
 
Jagannath Mishra said with folded hands, “Your journey is for the welfare of the world.
तात्पर्य
इस श्लोक की दूसरी पंक्ति का भावार्थ श्रीमद्भागवतम् (10.8.4) में मिलता है-

महाद-विचलनं नृणां गृहिणां दीन-चेतसाम |

निःश्रेयसाय भगवान् कल्पते नान्यथा क्वचित् ||

"हे प्रभु! हे महाभागवत! आप जैसे महागृहस्थ अनेक जगहों पर विचरण नहीं करते। जिन गृहस्थों की चेतना दीन है, उनका उद्धार करने के लिए ही आप इस प्रकार विचरण करते हैं। इसके अतिरिक्त अन्यत्र आपका कोई काम नहीं है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)