श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.5.25 
সুস্থ হৈ’ বসিলেন যদি বিপ্র-বর
তবে তানে মিশ্র জিজ্ঞাসেন,—“কোথা ঘর?”
सुस्थ है’ वसिलेन यदि विप्र-वर
तबे ताने मिश्र जिज्ञासेन,—“कोथा घर?”
 
 
अनुवाद
जब ब्राह्मण आराम से बैठ गया, तो जगन्नाथ मिश्र ने उससे पूछा, "आपका निवास कहाँ है?"
 
When the Brahmin sat down comfortably, Jagannatha Mishra asked him, "Where is your residence?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)