vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना
»
श्लोक 136
श्लोक
1.5.136
করুণা-সমুদ্র প্রভু শ্রী-গৌরসুন্দর
শ্রী-হস্ত দিলেন তান অঙ্গের উপর
करुणा-समुद्र प्रभु श्री-गौरसुन्दर
श्री-हस्त दिलेन तान अङ्गेर उपर
अनुवाद
तब दया के सागर भगवान गौरसुन्दर ने अपना करकमल ब्राह्मण के शरीर पर रख दिया।
Then Lord Gaursundara, the ocean of mercy, placed his lotus hand on the body of the Brahmin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×