श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  1.5.126 
আমারে দেখিতে নিরবধি ভাব’ তুমি
অতএব তোমারে দিলাঙ দেখা আমি”
आमारे देखिते निरवधि भाव’ तुमि
अतएव तोमारे दिलाङ देखा आमि”
 
 
अनुवाद
“तुम हमेशा मुझे देखने की इच्छा रखते हो, इसलिए मैं यहाँ हूँ!”
 
“You always want to see me, so here I am!”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)