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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना
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श्लोक 115
श्लोक
1.5.115
সবেই বোলেন,—“বান্ধ’ বাহির দুযার
বাহির হৈতে যেন নাহি পারে আর”
सबेइ बोलेन,—“बान्ध’ बाहिर दुयार
बाहिर हैते येन नाहि पारे आर”
अनुवाद
सबने कहा, “दरवाजा बाहर से बंद कर दो, ताकि वह बाहर न निकल सके।”
Everyone said, “Close the door from outside so that he cannot go out.”
तात्पर्य
सबने कहा, "दरवाज़े को बांध दो, ताकि वह उसे खोल कर बाहर ना आ सके।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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