श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  1.4.94 
একেশ্বর বাডীর বাহিরে প্রভু যায
খৈ, কলা, সন্দেশ, যা’ দেখে তা’ চায
एकेश्वर बाडीर बाहिरे प्रभु याय
खै, कला, सन्देश, या’ देखे ता’ चाय
 
 
अनुवाद
कभी-कभी भगवान अकेले ही घर के बाहर चले जाते और लोगों से जो कुछ भी देखते, मांग लेते - भुना हुआ धान, केला, या संदेश।
 
Sometimes Bhagavan would go out of the house alone and ask people for whatever he saw – roasted paddy, bananas, or sandesh.
तात्पर्य
एकेश्वर शब्द का अर्थ होता है "अकेला" या "किसी और के बिना"। एकेश्वर शब्द का अपभ्रंश, अश्वर, आज भी नोयाखली और चट्टोग्राम जिलों में प्रयुक्त होता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)