श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  1.4.93 
নিরবধি ধায প্রভু কি ঘরে, বাহিরে
পরম-চঞ্চল, কেহ ধরিতে না পারে
निरवधि धाय प्रभु कि घरे, बाहिरे
परम-चञ्चल, केह धरिते ना पारे
 
 
अनुवाद
भगवान लगातार घर के अंदर-बाहर भागते रहते थे। वे इतने बेचैन थे कि कोई उन्हें पकड़ नहीं पाता था।
 
Bhagavan was constantly running in and out of the house, so restless that no one could catch him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)