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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना
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श्लोक 91
श्लोक
1.4.91
হেন অঙ্গ-ভঙ্গী করি’ নাচে গৌরচন্দ্র
দেখিযা সবার হয অতুল আনন্দ
हेन अङ्ग-भङ्गी करि’ नाचे गौरचन्द्र
देखिया सबार हय अतुल आनन्द
अनुवाद
गौरचन्द्र द्वारा नृत्य करते समय प्रदर्शित की गई विभिन्न मुद्राओं को देखकर सभी को अतुलनीय प्रसन्नता का अनुभव हुआ।
Everyone felt immense joy watching the various postures displayed by Gaurchandra while dancing.
तात्पर्य
अंग-भंगी शब्द किसी के हाथों को झुलाने के कार्य को दर्शाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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