श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.4.8 
তাবত্ কান্দেন প্রভু কমল-লোচন
হরি-নাম শুনিলে রহেন তত-ক্ষন
तावत् कान्देन प्रभु कमल-लोचन
हरि-नाम शुनिले रहेन तत-क्षन
 
 
अनुवाद
जब भी कमल-नेत्र भगवान रोते, तो वे हरि के नामों का कीर्तन सुनकर ही रुकते।
 
Whenever the lotus-eyed Lord wept, he would stop only after hearing the chanting of Hari's names.
तात्पर्य
रहना शब्द का अर्थ "रुकना" या "बंद करना" है। (यह क्रिया आज भी बांग्लादेश में उपयोग की जाती है।)
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)