श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  1.4.73 
কেহ ’রক্ষা’ বান্ধে, কেহ পডে স্বস্তি-বাণী
অঙ্গে কেহ দেয বিষ্ণু-পাদোকক আনি’
केह ’रक्षा’ बान्धे, केह पडे स्वस्ति-वाणी
अङ्गे केह देय विष्णु-पादोकक आनि’
 
 
अनुवाद
किसी ने उन पर रक्षा-मंत्र बाँधा, किसी ने मंगल-स्तोत्र पढ़े, किसी ने उन पर चरणामृत छिड़का।
 
Someone tied a protective mantra on him, someone recited auspicious hymns, someone sprinkled charanamrit on him.
तात्पर्य
शब्द स्वस्ति-वाणी में, स्वस्ति सु और अस्ति से मिलकर बना है, जो एक आशीर्वाद है जिसका अर्थ है "आपके लिए सभी शुभ हो।" शब्द विष्णु-पादोकाक गंगा के जल या शालग्राम-शिला को स्नान कराने के लिए इस्तेमाल किए गए पानी को संदर्भित करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)