श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  1.4.70 
’গরুড’ ’গরুড’ বলি’ ডাকে সর্ব-জন
পিতা-মাতা-আদি ভযে করযে ক্রন্দন
’गरुड’ ’गरुड’ बलि’ डाके सर्व-जन
पिता-माता-आदि भये करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
वहाँ उपस्थित सभी लोग चिल्ला उठे, “गरुड़! गरुड़!” और भगवान के माता-पिता डर के मारे रोने लगे।
 
Everyone present there cried out, "Garuda! Garuda!" and the Lord's parents began to cry in fear.
तात्पर्य
गरुड़ पक्षियों के राजा और सापों के खत्म करने वाले हैं। आज भी लोग साँपों के भय से मुक्त होने के लिए गरुड़ की शरण लेते हैं या उनका नाम जपते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)