श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  1.4.51 
সর্ব-শুভ-ক্ষণ নাম-করণ-সমযে
গীতা, ভাগবত, বেদ ব্রাহ্মণ পডযে
सर्व-शुभ-क्षण नाम-करण-समये
गीता, भागवत, वेद ब्राह्मण पडये
 
 
अनुवाद
बालक के नामकरण संस्कार का अवसर अत्यंत शुभ था। ब्राह्मणों ने भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत और वेदों का पाठ किया।
 
The occasion of the child's naming ceremony was a very auspicious one. The Brahmins recited the Bhagavad Gita, the Srimad Bhagavatam, and the Vedas.
तात्पर्य
जिस भी ब्राह्मण या वैष्णव के घर में नामकरण किया जाता है वहाँ ब्राह्मण भगवदगीता, श्रीमद् भागवत और वैदिक साहित्य का पाठ करते हैं। इस अवसर पर सभी प्रकार के शुभ चिन्ह प्रबल होते हैं, जैसे शीतल हवाएं, अनुकूल मौसम आदि।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)