श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.4.49 
অতএব ইহান ’শ্রী-বিশ্বম্ভর’-নাম
কুল-দীপ কোষ্ঠীতেও লিখিল ইহান
अतएव इहान ’श्री-विश्वम्भर’-नाम
कुल-दीप कोष्ठीतेओ लिखिल इहान
 
 
अनुवाद
"इसलिए इस बालक का नाम श्री विश्वम्भर रखना चाहिए। यह नाम उनकी कुंडली में भी दिया गया है।"
 
"Therefore, this child should be named Shri Vishvambhar. This name is also given in his horoscope."
तात्पर्य
विश्वम्भर की जन्मकुण्डली की गणना से यह भी समझा जा सकता है कि वह भगवान् के सर्वोच्च व्यक्तित्व हैं और अन्य सभी विष्णु अवतारों के मूल स्रोत हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)