श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.4.42 
নীলাম্বর-চক্রবর্তী-আদি বিদ্যাবান্
সর্ব-বন্ধু-গণের হৈল উপস্থান
नीलाम्बर-चक्रवर्ती-आदि विद्यावान्
सर्व-बन्धु-गणेर हैल उपस्थान
 
 
अनुवाद
नीलाम्बर चक्रवर्ती के नेतृत्व में सभी विद्वान व्यक्ति तथा सभी मित्र और रिश्तेदार समारोह में आये।
 
All the learned persons and all the friends and relatives came to the function under the leadership of Nilambar Chakravarti.
तात्पर्य
उपस्थान शब्द का अर्थ "वर्तमान" या "एकत्रित" है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)