श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.4.32 
’জননী আইসে’,—হেন জানিযা আপনে
শযনে আছেন প্রভু, করেন রোদনে
’जननी आइसे’,—हेन जानिया आपने
शयने आछेन प्रभु, करेन रोदने
 
 
अनुवाद
जब वह समझ जाता कि उसकी माँ आ रही है, तो वह लेट जाता और रोने लगता।
 
When he understood that his mother was coming, he would lie down and start crying.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)