श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.4.25 
যত যত প্রবোধ করযে নারী-গণ
প্রভু পুনঃ পুনঃ করি’ করযে ক্রন্দন
यत यत प्रबोध करये नारी-गण
प्रभु पुनः पुनः करि’ करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
महिलाएं जितना अधिक भगवान को शांत करने का प्रयास करतीं, वे उतना ही अधिक रोते।
 
The more the women tried to calm the Lord, the more He cried.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)