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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना
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श्लोक 23
श्लोक
1.4.23
হেন মতে বৈসে প্রভু আপন-লীলায
কে তানে জানিতে পারে, যদি না জানায
हेन मते वैसे प्रभु आपन-लीलाय
के ताने जानिते पारे, यदि ना जानाय
अनुवाद
इस प्रकार भगवान ने अपनी लीलाएँ कीं। जब तक वे भगवान की प्रेरणा से न हों, उन्हें कौन समझ सकता है?
Thus did the Lord perform His pastimes. Unless they were inspired by the Lord, who could understand them?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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