श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.4.15 
কেহ বোলে,—’ধর, ধর, এই চোর যায’
’নৃসিṁহ’ ’নৃসিṁহ’ কেহ ডাকযে সদায
केह बोले,—’धर, धर, एइ चोर याय’
’नृसिꣳह’ ’नृसिꣳह’ केह डाकये सदाय
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, "पकड़ो उसे! पकड़ो उसे! चोर भाग रहा है!" कोई और बार-बार चिल्ला रहा था, "नृसिंह! नृसिंह!"
 
Someone shouted, "Catch him! Catch him! The thief is running away!" Someone else shouted repeatedly, "Nrisimha! Nrisimha!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)